Poem-Murdon Ki Basti Se

खून की दरिया में डूबी

इंसानियत की किश्ती

उजाले में भी बस्ती पर –

है सन्नाटा ! है खामोशी !!

मगर आवाज आती है

मुर्दों की बस्ती से-

ना हम हिंदू हैं और ना मुसलमान

हम हैं इसी मुल्क की संतान

तो फिर क्यों-

नफरत की खेती से उपज रही

मौत की फसलें !

और

कलंकित हो रही नाहक

राम रहीम की नस्लें !!

*** डॉ.मधेपुरी की कविता ***