माँ से छोटा
और ताकतवर शब्द
दुनिया में कोई और हो तो बता देना
माँ गम को छिपाकर
कहाँ रखती है
वो जगह मालूम हो यदि तो दिखा देना
मौत के रास्ते हैं अनगिनत
पर जन्म के लिए हर जीवधारी को
मां के पास ही पड़ता है आना
लोग कहते हैं आज माँ का दिन है
माँ के बिन कौन-सा दिन है
मालूम हो तो बताना
नहीं जानती माँ ताले में चाबी डालना
गिनती भी उसे कहाँ आती थी
मैं एक रोटी मांगता
वह दो लेकर आती थी
खुद पीकर मेरी राह का अंधेरा
आशा का हर दीप जलाती थी
बच्चों का पेट भरने को माँ
खुद पानी पीकर भी तृप्त हो जाती है
भाइयों के बीच बंटवारे में
बंट जाए बेशक सब कुछ
बस एक माँ की ममता ही है
जो बंट नहीं पाती है..!
*** डॉ.मधेपुरी की कविता ***