Impact of Corona

तू खेले मौत से होली जरा विश्राम ले लो
दुनिया हो गई रिचार्ज दूसरा काम ले लो
बढ़ाया सम्बन्धों के बीच में डिस्टेंस तुमने
आर्थिक मंदी का यह दु:खद पैगाम ले लो

आये चीन से चुपचाप जरा यह ख्याल कर लो
कर डाले बन्द यहाँ सब कुछ इसे भी याद कर लो
कहर ढाने की तेरी लालसा तो व्यर्थ है अब
दुआएं लोकहित ले स्वयं को आबाद कर लो

कोरोना संक्रमित होकर धरा यह क्लेश में है
यहाँ कुछ लोग अन्दर और बाहर द्वेष में है
अधिक बर्बाद मत कर सुख सुरभि संसार का तुम
डुबोने जगत को फिरता दनुज हर वेश में है

‘घर में सुरक्षित हों’ यही सिखला दिया तुमने
रामायण-महाभारत पुनः दिखला दिया तुमने
नाक-मुंह को सहज ही गुप्तांग बनाने वाले
नहीं झाँपने वालों को मजा सिखला दिया तुमने

तुमने अनपढ़ों को भी यहाँ पढ़ना सिखा दिया
मास्क-हैंडवास-डिस्टेंसिंग सब कुछ बता दिया
देहातियों को तुमने सहज ही पटना दिखा दिया
सुख-चैन वाले बुजुर्गों को पुरकस सता दिया

तुम्हारे ठहराव से अब सबका मन उबा जा रहा है
मालिक-मजदूर का सुख-सौंदर्य लुटा जा रहा है
बुजुर्गों के अन्तर्मन का हाल न पूछो ‘मधेपुरी’
नई पीढ़ियों का भी दम अब घुटा जा रहा है

*** डॉ.मधेपुरी की कविता ***