Dr.Homi Jahangir Bhabha

Dr.Homi Jahangir Bhabha

प्रिय पाठकगण ! धैर्यपूर्वक स्मरण करें :-

डॉ.अंबेडकर ! जिनकी लिखी डायरी को कोलंबिया विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाती हो, जिन्हें भारतीय संविधान का निर्माता कहा जाता हो………… और भारत के लौह पुरुष कहलाने वाले सरदार पटेल सरीखे अद्वितीय व्यक्तित्वद्वय को मृत्यु के लगभग 35-40 वर्षों के बाद तब ‘भारतरत्न’ दिया गया…….. जब पायलट से प्रधानमंत्री बने राजीव गांधी को मरने के चंद महीने बाद उन्हें यह सर्वोच्च सम्मान दिया जा रहा था…….. तो क्या ‘फादर ऑफ न्यूक्लियर पावर’ कहलानेवाले एवं ‘Atom for Peace’ के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता करने हेतु जिनेवा जानेवाले महान वैज्ञानिक डॉ.भाभा को अब राहुल गाँधी जी के साथ ही ‘भारतरत्न’ दिया जायेगा……!

डॉ.भाभा  सरीखे महान विज्ञानवेत्ता, जो कुछ दिन पूर्व वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन से मुलाकात करके आये ही थे, 24 जनवरी, 1966 को एयर इंडिया के बोइंग 707 में सवार होकर बम्बई से भाया दिल्ली जिनेवा जा रहे होते हैं कि उनका जहाज आल्प्स पर्वत श्रृंखला से टकरा जाता है और भाभा उसी सफ़ेद बर्फ में आज तक सोये रह जाते हैं | शरीर कितने टुकड़ों में बंटा होगा किसे पता ….?

तब से ही अनेक पर्वतारोही आल्प्स पर्वत की चोटियों की बर्फीली चट्टानों को उकेड़ते रहे हैं…….और उसी क्रम में 5 वर्ष पूर्व एक बैग और कैमरा मिला भी…….और हाल-फ़िलहाल लगभग एक सप्ताह पूर्व 27 जुलाई, 2017 को वहीं पर एक पर्वतारोही डेनियल रोचे को मिला मानव शरीर का एक ‘हाथ’……..!

भले ही वह हाथ दुर्घटना में मौत को गले लगाने वाले 117 यात्रियों में से किसी का भी हो…… परंतु, डॉ.भाभा का वह हाथ भी तो अभी भी उसी बर्फ में होगा जिस हाथ ने 1940 में इंग्लैंड के कैंब्रिज विश्वविद्यालय में भौतिकी के यशस्वी प्राध्यापक के पद को छोड़ने से पूर्व त्यागपत्र लिखा होगा……  और भारत आकर नोबेल पुरस्कार प्राप्त डॉ.सी.वी.रमन के बंगलौर वाले ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस’ में उनके साथ काम किया होगा !

-1945 में उसी हाथ ने ‘टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च’ की स्थापना की होगी और डॉ.भाभा को पहला निदेशक बनाया गया होगा |

-1948 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू से मिलकर ‘एटॉमिक एनर्जी कमीशन’ की स्थापना भी उन्ही हाथों द्वारा डॉ.भाभा ने की होगी और उन्हें प्रथम अध्यक्ष बनाया गया होगा……|

-1955 में मुम्बई के समीप वाले ट्रांबे में एशिया का पहला ‘परमाणु अनुसंधान केंद्र’ उन्हीं हाथों द्वारा स्थापित किया गया होगा जिसके प्रथम निदेशक बनाये गये थे डॉ.भाभा……. और जिनके निर्देशन में- अप्सरा, सिरान एवं जरलीना नामक 3 परमाणु ऊर्जा केंद्रों का निर्माण किया गया था |

पाठकगण ! याद करें !! डॉ.भाभा के उन्हीं कर्मठ हाथों के कारण भारत में ‘परमाणु युग’ का प्रवेश हो पाया था जिसे डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम जैसों ने आगे बढ़ाया…….|

-1962 में डॉ.भाभा के उन्हीं कर्मठ हाथों द्वारा ‘इलेक्ट्रॉनिक्स समिति’ की स्थापना भी की गई जिसके प्रथम अध्यक्ष बनाये गये डॉ.भाभा |

और…….. आगे आती है वही मनहूस घड़ी, 1966 के जनवरी माह की 24 तारीख (गुरुवार)…….. जिस दिन से आजतक अनेक पर्वतारोही आल्प्स पर्वत के उस बर्फ को उकेड़ने में लगे हैं………|

घटना की जानकारी मिलते ही समस्त भारत मर्माहत हो गया था | सारे देशवासियों के चेहरे बर्फ की तरह सफेद हो गए थे | ऐसी घटना घटेगी किसी ने सोचा भी न होगा | ऐसा लगा जैसे सब कुछ थम-सा गया | एक दिन बाद गणतंत्र दिवस के प्रातः काल से ही प्रत्येक बच्चे-बूढ़े भारतीय तिरंगे के सफेद रंग में आप्ल्स पर्वत के सफेद बर्फ को ही देखता रह गया…|

जिस महान वैज्ञानिक डॉ.होमी जहांगीर भाभा ने भारत के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था उसे अंतिम घड़ी में भी भारत कुछ दे न सका….. आज तक ‘भारतरत्न’ भी नहीं…… जिसके लिए मैं प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से एक नहीं अनेक बार सरकार तक अपनी बातें पहुँचाता रहा हूं | अब आप भी तो मुँह खोलिए ……..कुछ भी तो बोलिए !!

और…….. अब तो इस पर्वतारोही डेनियल रोचे को उसी हाथ से सटे डॉ.भाभा के सम्पूर्ण भारतीय दिल से…….. तथा निर्दोष-निष्कलंक रूह से निकल रही ये आवाजें भी सुनाई पड़ने लगी है-

‘विज्ञान संहार के लिए नहीं, मानवता की भलाई के लिए है और ‘ATOM FOR PEACE’ सम्पूर्ण धरती के लिए है…..!!’

*** डॉ.मधेपुरी की बातें ***