Dr.Bhupendra Madhepuri hoisting Indian National Flag at Madhepura .

Dr.Bhupendra Narayan Madhepuri hoisting Indian National Flag at Madhepura .(File Photo)

 

हमारे पूर्वजों ने अपना सबकुछ न्योछावर करने के बाद हमें ‘आजादी’ दी……. क्योंकि उन्होंने शपथ ली थी कि…….

“जब तक जीवित रहूँगा तबतक आर्यावर्त के कल्याण में लगा रहूँगा | भारत की बेबस जनता, जो नाना प्रकार के कष्ट भोग रही है, उसका उद्धार करूँगा……. और आजादी के लिए यदि प्राण न्योछावर करने की जरूरत पड़ेगी तो पैर पीछे नहीं हटाऊंगा |”

प्रिय पाठकगण ! हम अपने अतीत को जाने बिना ना तो अपने भविष्य को गढ़ सकते हैं और ना ही वर्तमान में प्रगति पथ पर एक कदम भी आगे बढ़ सकते हैं ! याद कीजिए….. यही पटना जब कुसुमपुर नाम से जाना जाता था तब यहाँ गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री आर्यभट्ट का जन्म हुआ था, जिनके लिए विश्वविख्यात वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन ने अपनी डायरी में लिखा है-

मैं भारत के आर्यभट्ट सरीखे गणितज्ञों के सामने सिर झुकाता हूं जिन्होंने विश्व को गणित का ज्ञान दिया वरना आज जितना आविष्कार हुआ है उसका आधा भी संभव नहीं हो पाता………|
सोचिए तो सही ! हम कहाँ थे और कहाँ पहुँच गये……….!! आज इस स्वतंत्रता दिवस पर मैं अपनी चन्द पंक्तियां आपसे शेयर करना चाहता हूँ………

आजादी      मिल    गई    हमें
पर हम अपनी पहचान भुलाये
ऊपर    से     हम    कहें    बुरा
पर  लूट   हमें  अन्दर  से  भाये

लो  मिली मुल्क को  आजादी
सचमुच   हम आज़ाद  हो  गये
पूर्वज  की  गौरव  समाधि  पर
लेकिन   हम  सौ बार  रो   गये

कुछ और पंक्तियाँ भारत के चन्द वीर-वीरांगनाओं के लिए-

पर्वत  से  वे  अचल  अडिग  थे
कोई   भी   डोला   न  कभी  रे
जेल-सेल   कोड़े    शूली   तक
मुँह  अपना  खोला न कभी रे

अपने  मज़हब  भूल गये  सब
तब   मज़हब  था  रे आजादी
मृत्यु  वरण करने  तक सारे
संकल्पित  थे   वे    फौलादी

हैदर  टीपू   वाजिद   को   अब
कौन   यहाँ   रे   भुला   सकेगा
इस    धरती    पर  कभी   नहीं
अब इन्कलाब का ज्वार  रुकेगा

देखो    यह   बाँह    कुँवर    की
गंगा  में  शोणित  घोलने  लगी
चोटी  पर  पहुँची   शिवा-शक्ति
धरती    डगमग     डोले    लगी

अभिमन्यु सदृश ‘आजाद’ वीर
खुद  को  गाली  से  भून  लिया
सिर उठा भगत-सुख-राज यहाँ
हँसकर  शूली   को  चूम  लिया

गोखले  तिलक  गाँधी  सुभाष
नेहरु     लोहिया    जयप्रकाश
सभी    दीवाने    आजादी    के
कर दिया एक  क्षिति महाकाश

उषा  वेला   औ   शान्ति   सुधा
अरुणा    सरोजनी     कल्याणी
रे    लड़ी    खूब     मर्दानी    सी
शन्नो बन    झाँसी   की    रानी

आओ सब मिलकर करें बन्धु,आजादी का शत अभिनन्दन |
इसके ललाट पर करें नित्य, अपने अनंत श्रम का चन्दन ||

*** डॉ.मधेपुरी का हृदयोद्गार ***